आज ज़िन्दगी फ़िर खुश है...
ग़मों को पीछे छोड़,
जाने कहाँ बेफिक्री में दौडे जा रही है ....
बोहोत दिनों से हँसी नही थी ज़िन्दगी,
कितनी तनहा सी थी॥ परेशान सी...
ना कोई उमंग थी, ना कोई तरंग थी,
कांटे ही कांटे बिछे थे राहो में ....
ना कोई अपना था न पराया,
ना दुश्मन था कोई, ना हमसाया.........
आज फ़िर से खुल के हसने का दिल कर रहा है
गाने का दिल कर रहा है
नाचने का, झूमने का दिल कर रहा है...
आज फ़िर दिल कर रहा है,
दूर गगन में उड़ जाऊ मैं,
बहते पानी के साथ बह जाऊ मैं,
चिडियों के साथ खेलूँ,
मस्त मयूर बन जाऊँ........
आज ज़िन्दगी फ़िर खुश है ....
फ़िर से जीना चाहती है,
मुस्कुराना चाहती है,
बंधन तोड़ के
छूट जाना चाहती है ....
बेफिक्री में फ़िर से दौडे जा रही है ज़िन्दगी..................
Saturday, April 11, 2009
Sunday, March 1, 2009
मेरा साया

कभी दिखता है.......
कभी ओझल सा हो जाता है,
कभी लगता है भ्रम सा .......
कभी असल सा हो जाता है,
क्या कोई अपना आया है ......
या फ़िर वो मेरा साया है ...........................
कभी रहता है दिल में...
कभी आँसू बन के बह जाता है,
कभी खामोश रहता है...
कभी मासूमियत से कह जाता है,
क्या सच कोई मेरे पास आया है .....
या फ़िर वो मेरा साया है .........................
कैसे समझूंगी मैं ...
कौन समझायेगा अब,
जो मुझमें था कभी ...
वो बस एक ख्वाब है अब,
क्या मुझसे बतियाने आया है....
या फ़िर वो मेरा साया है ........................
मैं जिसे छू नहीं सकती,
प्यार नहीं कर सकती,
अपना नहीं कह सकती,
देख नहीं सकती,
कल्पना भी नहीं सकती,
वो मुझे बुलाने आया है...
शायद ..... वो मेरा साया है...
हाँ वो मेरा साया ही है .....................................
कभी ओझल सा हो जाता है,
कभी लगता है भ्रम सा .......
कभी असल सा हो जाता है,
क्या कोई अपना आया है ......
या फ़िर वो मेरा साया है ...........................
कभी रहता है दिल में...
कभी आँसू बन के बह जाता है,
कभी खामोश रहता है...
कभी मासूमियत से कह जाता है,
क्या सच कोई मेरे पास आया है .....
या फ़िर वो मेरा साया है .........................
कैसे समझूंगी मैं ...
कौन समझायेगा अब,
जो मुझमें था कभी ...
वो बस एक ख्वाब है अब,
क्या मुझसे बतियाने आया है....
या फ़िर वो मेरा साया है ........................
मैं जिसे छू नहीं सकती,
प्यार नहीं कर सकती,
अपना नहीं कह सकती,
देख नहीं सकती,
कल्पना भी नहीं सकती,
वो मुझे बुलाने आया है...
शायद ..... वो मेरा साया है...
हाँ वो मेरा साया ही है .....................................
Wednesday, February 25, 2009
कुछ नहीं बचा अब !!!!!!!!!!!!!!!!!!!
अब जी नहीं करता
किसी के कंधे पे सर रख के रोऊ मैं...
कोई मेरा हाथ थामे
मुझे अपना कहे
अब जी नहीं करता........
कोई फर्क भी तो नहीं पड़ता अब
कोई फ़ायदा भी तो नहीं है
अब सारे रिश्ते जिस्मानी ही तो रह गए हैं
इसलिए अब मन नहीं करता...
किसी के दामन का सहारा लूँ
किसी को अपना कहूं.....
एक काँटा चुभा दिल में,
आह भी निकली
दर्द भी हुआ
मगर.......
हर सिसकी रेत में पड़ी बूँद की तरह
कहीं खो गई ..........
ज़िन्दगी एक खुली किताब तो थी ही
अब उस किताब के
कुछ खाली पन्ने ही बचे हैं ............
अब तो दर्द को भी दर्द नहीं होता
एक छोर से दूसरे छोर तक
सब खाली ही खाली है.........
और भरने वाला कोई नहीं....
बेरंग सी हो गई है ज़िन्दगी अब तो
लगने लगा है कोई साथ नहीं है मेरे .........
अब वाकई जी नहीं करता.....................................
किसी के कंधे पे सर रख के रोऊ मैं...
कोई मेरा हाथ थामे
मुझे अपना कहे
अब जी नहीं करता........
कोई फर्क भी तो नहीं पड़ता अब
कोई फ़ायदा भी तो नहीं है
अब सारे रिश्ते जिस्मानी ही तो रह गए हैं
इसलिए अब मन नहीं करता...
किसी के दामन का सहारा लूँ
किसी को अपना कहूं.....
एक काँटा चुभा दिल में,
आह भी निकली
दर्द भी हुआ
मगर.......
हर सिसकी रेत में पड़ी बूँद की तरह
कहीं खो गई ..........
ज़िन्दगी एक खुली किताब तो थी ही
अब उस किताब के
कुछ खाली पन्ने ही बचे हैं ............
अब तो दर्द को भी दर्द नहीं होता
एक छोर से दूसरे छोर तक
सब खाली ही खाली है.........
और भरने वाला कोई नहीं....
बेरंग सी हो गई है ज़िन्दगी अब तो
लगने लगा है कोई साथ नहीं है मेरे .........
अब वाकई जी नहीं करता.....................................
Sunday, February 1, 2009
ज़िन्दगी.............
प्यार किया है कभी ...............
तुमने खामोशी को
बोलते सुना है कभी...........
तुमने उदासो को
चहकते देखा है कभी .............
तुमने धूप को
ठिठुरते देखा है कभी ............
तुमने आकाश को
छटपटाते देखा है कभी............
तुमने सागर को
बरसते देखा है कभी ............
नहीं ..... शायद कभी नहीं.......
क्यूंकि तुमने ख़ुद को ही नहीं देखा कभी
कभी ख़ुद को देखो, पहचानो, महसूस करो, तराशो ...
और जानो ज़िन्दगी क्या है .............
नज्में तो बहुत लिखी
प्यार किया है कभी ...............
तुमने खामोशी को
बोलते सुना है कभी...........
तुमने उदासो को
चहकते देखा है कभी .............
तुमने धूप को
ठिठुरते देखा है कभी ............
तुमने आकाश को
छटपटाते देखा है कभी............
तुमने सागर को
बरसते देखा है कभी ............
नहीं ..... शायद कभी नहीं.......
क्यूंकि तुमने ख़ुद को ही नहीं देखा कभी
कभी ख़ुद को देखो, पहचानो, महसूस करो, तराशो ...
और जानो ज़िन्दगी क्या है .............
नज्में तो बहुत लिखी
प्यार किया है कभी ...............
Thursday, January 29, 2009
Saathi!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
Mujhe mujhse mila gaya koi.................
Dil Ke soye taaron ko jaga gaya koi....
mujhe mujhse mila gaya koi ...
fir ek baar tammana hai jagi,
fir ek baar mehfil hai saji,
yadon ko gulzar bana gaya koi...
dil ki har dhadkan ko badha gaya koi
soye armaano ko aayina dikha gaya koi...
kuch is tarah ek baar fir mujhe mujhse mila gaya koi...
Wednesday, January 21, 2009
Pathar...
"Pathar to Pathar hote hain"
Taa umr patharon ko pooja, patharon ko chaha,
yeh jaante hue bhi..
patharon mein dil nahin hota...
patharon ke khwab nahin hote...
patharon mein pyar nahin hota...
koi ahsaas nahin hota...
patharon ko dard nahin hota...
koi jazbaat nahin hote...
fir bhi patharon ko hi apna khuda banaya
patharon ki hi chot kha kar
patharon ne hi humko pathar banaya...
har ahsaas se pare...pathar sirf pathar hote hain...
yeh aapke dil mein jagah banate hain chot dene ke liye .................................
Taa umr patharon ko pooja, patharon ko chaha,
yeh jaante hue bhi..
patharon mein dil nahin hota...
patharon ke khwab nahin hote...
patharon mein pyar nahin hota...
koi ahsaas nahin hota...
patharon ko dard nahin hota...
koi jazbaat nahin hote...
fir bhi patharon ko hi apna khuda banaya
patharon ki hi chot kha kar
patharon ne hi humko pathar banaya...
har ahsaas se pare...pathar sirf pathar hote hain...
yeh aapke dil mein jagah banate hain chot dene ke liye .................................
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