आज ज़िन्दगी फ़िर खुश है...
ग़मों को पीछे छोड़,
जाने कहाँ बेफिक्री में दौडे जा रही है ....
बोहोत दिनों से हँसी नही थी ज़िन्दगी,
कितनी तनहा सी थी॥ परेशान सी...
ना कोई उमंग थी, ना कोई तरंग थी,
कांटे ही कांटे बिछे थे राहो में ....
ना कोई अपना था न पराया,
ना दुश्मन था कोई, ना हमसाया.........
आज फ़िर से खुल के हसने का दिल कर रहा है
गाने का दिल कर रहा है
नाचने का, झूमने का दिल कर रहा है...
आज फ़िर दिल कर रहा है,
दूर गगन में उड़ जाऊ मैं,
बहते पानी के साथ बह जाऊ मैं,
चिडियों के साथ खेलूँ,
मस्त मयूर बन जाऊँ........
आज ज़िन्दगी फ़िर खुश है ....
फ़िर से जीना चाहती है,
मुस्कुराना चाहती है,
बंधन तोड़ के
छूट जाना चाहती है ....
बेफिक्री में फ़िर से दौडे जा रही है ज़िन्दगी..................
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