प्यार किया है कभी ...............
तुमने खामोशी को
बोलते सुना है कभी...........
तुमने उदासो को
चहकते देखा है कभी .............
तुमने धूप को
ठिठुरते देखा है कभी ............
तुमने आकाश को
छटपटाते देखा है कभी............
तुमने सागर को
बरसते देखा है कभी ............
नहीं ..... शायद कभी नहीं.......
क्यूंकि तुमने ख़ुद को ही नहीं देखा कभी
कभी ख़ुद को देखो, पहचानो, महसूस करो, तराशो ...
और जानो ज़िन्दगी क्या है .............
नज्में तो बहुत लिखी
प्यार किया है कभी ...............
Sunday, February 1, 2009
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